छोटे किसानों के लिए फायदेमंद है ग्रीनहाउस मॉडल
कम लागत वाला ग्रीनहाउस मॉडल छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के दौर में यह तकनीक किसानों को बेहतर उत्पादन, कम जोखिम और अधिक आय हासिल करने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि अब कई राज्य सरकारें और संस्थाएं इसे बड़े पैमाने पर अपनाने की दिशा में काम कर रही है
जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ती खेती लागत के बीच छोटे किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। हैदराबाद स्थित एग्री-टेक सोशल एंटरप्राइज Kheyti द्वारा विकसित कम लागत वाली संरक्षित खेती (Protected Cultivation) तकनीक को अब कई राज्य सरकारों और नाबार्ड (NABARD) ने अपनाना शुरू कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल छोटे और सीमांत किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और मौसम संबंधी जोखिमों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
कई राज्यों में अपनाया गया मॉडल
Kheyti के अनुसार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों के साथ-साथ नाबार्ड ने भी इस तकनीक को अपने कार्यक्रमों में शामिल किया है। कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस मॉडल का सफल परीक्षण देश के आठ राज्यों के 7,000 से अधिक किसानों के साथ किया गया है। इसके बाद अब इसे बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
क्या है यह कम लागत वाला ग्रीनहाउस?
पारंपरिक ग्रीनहाउस बनाने में काफी अधिक खर्च आता है, जिसके कारण छोटे किसान इसे अपनाने में सक्षम नहीं होते। Kheyti ने इसी समस्या का समाधान निकालते हुए एक कम लागत वाला शेड-नेट आधारित संरक्षित खेती मॉडल विकसित किया है।
यह संरचना पारंपरिक ग्रीनहाउस की तुलना में काफी सस्ती है। छोटे किसानों की जमीन के अनुसार डिजाइन की गई है। फसलों को अत्यधिक गर्मी, बारिश और मौसम के उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद करती है। बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त करने में सहायक है।
किसानों को मिलेगी AI आधारित सलाह
इस मॉडल की एक खास बात यह है कि किसानों को केवल संरचना ही नहीं, बल्कि AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित कृषि सलाह भी दी जाती है। किसानों को मोबाइल आधारित निर्णय सहायता प्रणाली, फसल प्रबंधन संबंधी सुझाव, खेत स्तर पर कृषि विशेषज्ञों (Agronomists) का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे सही समय पर सही निर्णय ले सकें।
ICAR-IIHR ने भी की सराहना
कंपनी के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने इस कम लागत वाले शेड-नेट मॉडल का तकनीकी मूल्यांकन किया। संस्थान ने इसे किफायती, सुरक्षित, अच्छी तरह डिजाइन किया गया मॉडल बताते हुए किसानों के लिए उपयुक्त माना है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को दिया सुझाव
7 मार्च 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) ने देशभर के राज्य बागवानी मिशन निदेशकों को पत्र लिखकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली संरक्षित खेती को बढ़ावा देने पर विचार करने को कहा था। IIHR की रिपोर्ट के आधार पर यह भी सुझाव दिया गया कि छोटे आकार के कम लागत वाले नेट-हाउस मॉडल को MIDH की योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार
Kheyti की सह-संस्थापक और पब्लिक एंड गवर्नमेंट पार्टनरशिप प्रमुख सौम्या के अनुसार, पिछले दो वर्षों में यह साबित हुआ है कि यदि तकनीक को छोटे किसानों की जरूरतों और आर्थिक क्षमता के अनुसार विकसित किया जाए, तो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य तकनीक को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना और AI आधारित सलाह के माध्यम से उनकी सफलता सुनिश्चित करना है।
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