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पश्चिमी सिंहभूम में DMFT फंड बना लुट का अड्डा

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चाईबासा: जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) का मुख्य उद्देश्य खनिज प्रभावित क्षेत्र में समुदाय का विकास करना है । कोल्हान प्रमंडल का पश्चिमी सिंहभूम जिला खनिज सम्पदाओं से समृद्ध है। यहाँ एशिया प्रसिद्ध लौह आयस्क खान चिरिया (चिड़िया) 1918 में स्थापित हुआ था । इसके अलावे लौह अयस्क खान-गुवा, किरिबुरू- मेघहतुबुरू, नोवामुण्डी सहित कई नीजी खान भी स्थापित है। इन सरकारी एवं गैर सरकारी लौह अयस्क खान प्रबंधन द्वारा कॉरपोरेट समाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत खान प्रभावित क्षेत्र का समुचित विकास के लिए खान और खजिन अधिनियम-1957 में संशोधन कर बने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट में अगस्त-2025 तक 3344 करोड़ जमा किए गए थे। इस राशि से खनन् प्रभावित क्षेत्र सारंडा के लोगों को शुद्ध पेयजल, बेहतर शिक्षा, स्वस्थ्य,पोषण, महिलाओं और बच्चों का समुचित कल्याण, कौशल विकास, सिंचाई और जलछाजन जैसी कल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर मौलिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना है।

जमीन पर  DMFT के अंतर्गत किए गए विकास कार्यों की समीक्षा करने पर स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आती है । ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से DMFT फंड से ज्यादातर सड़क, नाला, नाली, भवन बनाएं जाते है । ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें 40 प्रतिशत तक कमीशन का खेल चलता है । समुदाय का विकास तो दूर उसके लिए DMFT फंड से समुदाय आधारित योजना का भी निर्माण नहीं किया जाता है । सारंडा क्षेत्र में बच्चों और महिलाओं में कुपोषण दर पूरे झारखंड में सबसे ज्यादा है । इसके बावजूद इस फंड से एक रुपया भी सरकार पोषण पर खर्च नहीं करती है ।

DMFT फंड का लाभ खनिज से प्रभावित समुदाय को मिलना चाहिए लेकिन दूरभग्यपूर्ण है कि चिरिया, गुवा, किरीबुरू, नोवामुण्डी लौह अयस्क खान से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। खनन् प्रभावित क्षेत्र सारंडा के लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे है। एशिया प्रसिद्ध चिरिया लौह अयस्क खान से प्रभावित अंकुआ, दुबिल-हेन्देदिरी एवं गुवा लौह अयस्क खान से प्रभावित जोजोगुटू, सेतारूईया को देखा जा सकता है। खान सरण्डा प्रभावित क्षेत्र के युवा रोजगार के अभाव में अन्य राज्यों में असुरक्षित पलायान को विवश है। खान प्रभावित क्षेत्र सारंडा के विद्यालयों के स्वीकृत पदों में शिक्षकों का घोर अभाव है। स्वस्थ्य सुविधाओं से भी ग्रामीण वंचित है। उप स्वस्थ्य केन्द्र (छोटानागरा-सरण्डा) में चिकित्सा वाहन तक नहीं है। “कौशल विकास ‘ग्रामीणों के लिए सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह गया है। खान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को पीने योग्य शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने को लेकर करोड़ों रूपए खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद अभी भी ग्रामीण नदी-चूवाँ का पानी पीने को विवश है।

जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियमावली में उल्लेखित योजनाओं को छोड़कर DMFT की राशि को संबंधित अधिकारियों द्वारा अपने चहेतो संवेदकों को लाभ पहुँचाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।  वित्तीय वर्ष-2024-2025 में 8755 योजनाएँ स्वीकृत हुई थी । इसमें से अभी भी 3000 योजनाएं अपूर्ण है । इस पूरे योजना के कार्य की जांच विधान सभा की उच्च कमिटी द्वारा की जानी चाहिए ।

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