दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा था, लेकिन इसकी गति काफी धीमी रही। 23 जून तक मानसून राज्य के 24 में से 22 जिलों तक ही पहुंच पाया। मौसम विभाग के अनुसार, 23 जून तक झारखंड में केवल 49.5 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 122.6 मिमी होनी चाहिए थी।
झारखंड में इस बार कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में जून महीने में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती प्रभावित होने लगी है। पीटीआई की रिपोर्ट अनुसार, कई जिलों में किसान अभी तक धान की नर्सरी तैयार नहीं कर पाए हैं, जबकि जिन किसानों ने नर्सरी लगा ली है, उन्हें पौध सूखने का डर सता रहा है। हालांकि राज्य सरकार और कृषि वैज्ञानिकों ने स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजना (कंटिजेंसी प्लान) तैयार कर रखी है और किसानों को कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है।
कई जिलों में धान की तैयारी नहीं हो सकी
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान धान की बुवाई की तैयारी शुरू नहीं कर पाए हैं। सामान्य तौर पर इस समय तक धान की नर्सरी तैयार हो जाती है और जुलाई के पहले सप्ताह से रोपाई का काम शुरू हो जाता है। गढ़वा जिले के किसान भूषण सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने से किसान नर्सरी तक तैयार नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने कहा कि हर साल इस समय तक खेत और पौध तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। किसानों का कहना है कि खेत तैयार नहीं हो पाए हैं और किसानों को अभी तक सरकारी धान बीज नहीं मिला है।
राज्य में 60% बारिश की कमी
मौसम विभाग के अनुसार, 23 जून तक झारखंड में केवल 49.5 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 122.6 मिमी होनी चाहिए थी। राज्य के कई जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है, इनमें सबसे ज्यादा गढ़वा में 99% बारिश की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा साहिबगंज में 98% और अन्य 16 जिलों में 60% से अधिक बारिश की कमी दर्ज हुई।
मानसून की रफ्तार धीमी
दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा था, लेकिन इसकी गति काफी धीमी रही। 23 जून तक मानसून राज्य के 24 में से 22 जिलों तक ही पहुंच पाया। रांची मौसम केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने पीटीआई को बताया कि गढ़वा और पलामू जिलों में अगले 2-3 दिनों में मानसून पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 26 जून के बाद मानसून सक्रिय होने की उम्मीद है, जबकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने दी वैकल्पिक फसलों की सलाह
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के अनुसंधान निदेशक डॉ. पी.के. सिंह ने कहा कि वर्तमान स्थिति किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने बताया कि किसानों को धान के बजाय या उसके साथ-साथ कम पानी वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी जा रही है। विश्वविद्यालय ने सरकार को एक विशेष आकस्मिक योजना भी सौंपी है।
डॉ. सिंह के अनुसार, निचले क्षेत्रों में धान की सीधी बुवाई करें, ऊंची भूमि पर दलहन फसलें लगाएं, सामान्य परिस्थितियों में धान बुवाई की अंतिम उपयुक्त अवधि 15 जुलाई मानी जाती है। बदलते मौसम के कारण अब कई बार बुवाई अगस्त के पहले सप्ताह तक भी होती है।
सरकार ने तैयार की आकस्मिक योजना
झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने मई महीने में ही राज्यव्यापी आकस्मिक योजना तैयार कर ली थी। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि कार्यशालाओं के माध्यम से बदलते मौसम के अनुसार खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा
सरकार किसानों को जलवायु अनुकूल फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें मड़ुआ (फिंगर मिलेट), मक्का और दलहन फसलें शामिल हैं। इसके अलावा किसानों की आय को स्थिर रखने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन और वन उत्पाद आधारित व्यवसाय को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्र से राहत पैकेज की मांग
कृषि मंत्री ने हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक में कम बारिश वाले जिलों के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है, इसलिए केंद्र सरकार को अतिरिक्त सहायता देनी चाहिए।
उर्वरक उपलब्धता का मुद्दा भी उठा
राज्य सरकार ने केंद्र से 3.90 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, जबकि अभी तक 3.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने की मंजूरी मिली है।राज्य सरकार ने बाकी उर्वरक भी समय पर उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि किसानों को खरीफ सीजन में किसी तरह की परेशानी न हो।
झारखंड में 60% बारिश की कमी : खतरे में धान की खेती

